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EEG TEST अब श्री साई अस्पताल नाहन में आप करवा सकेगें ईईजी टैस्ट, दिमागी रोगों का पता लगाने के लिए किया जाता है ईईजी टैस्ट

EEG TEST अब श्री साई अस्पताल नाहन में आप करवा सकेगें ईईजी टैस्ट, दिमागी रोगों का पता लगाने के लिए किया जाता है ईईजी टैस्ट

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EEG TEST अब श्री साई अस्पताल नाहन में आप करवा सकेगें ईईजी टैस्ट, दिमागी रोगों का पता लगाने के लिए किया जाता है ईईजी टैस्ट

अब श्री साई अस्पताल नाहन में आप करवा सकेगें ईईजी टैस्ट

प्रत्येक शुक्रवार को दिमाग संबधि रोगों के लिए ईईजी टेस्ट सुविधा का लाभ उठाएं



नाहन
श्री साई अस्पताल नाहन में अब दिमागी रोगों संबधि एक ओर सुविधा को उपलब्ध करवाया जा रहा है, अब दिमागी रोगों का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम (ईईजी) टेस्ट की सुविधा श्री साई अस्पताल नाहन में मुहैया करवा दी गई है। इस सुविधा के लिए लोगों को अब बाहरी राज्यों में भटकने की आवश्यकता नही होगी। ये टेस्ट प्रत्येक शुक्रवार को श्री साई अस्पताल में किफायती दरों पर किया जा रहा है। इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम (ईईजी) टेस्ट ब्रेन यानी कि मस्तिष्क से संबंधित टेस्ट है। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क के इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को जानना है। क्योंकि ब्रेन सेल्स एक दूसरे से इलेक्ट्रिक इम्पल्स के द्वारा संपर्क करती हैं। जब ये कोशिकाएं आपस में संपर्क नहीं कर पाती हैं तो इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम टेस्ट की जरूरत पड़ती है। जानकारी देते हुए श्री साई अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ वरूण गर्ग ने बताया कि इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम मस्तिष्क के तरंगों के पैटर्न को रिकॉर्ड करता है। छोटे, चपटे मेटल के डिस्क का इस्तेमाल इस टेस्ट में किया जाता। दिमागी रोगों की गहनता से जांच हेतु ईईजी टेस्ट अत्यंत जरूरी होता है।


कब है जरूरत?

इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम को तब किया जाता है जब ब्रेन डिसऑर्डर के लक्षण सामने आते हैं। जैसे- मिरगी आना, ब्रेन ट्यूमर, सिर में चोट के कारण ब्रेन डैमेज हो जाना, एन्सेफेलोपैथी, यानी कि कई कारणों से मस्तिष्क का सही से काम न करन, ब्रेन में जलन या दर्द होना, स्ट्रोक,स्लीप डिसऑर्डर के साथ साथ इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम का इस्तेमाल कोमा में गए हुए व्यक्ति में ब्रेन डेड को कंफर्म करने के लिए भी किया जाता है। इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम में अपने आप आपके मस्तिष्क तरंगों का वीडियो रिकॉर्ड हो जाता है। इन्हीं तरंगों के आधार पर डॉक्टर पता करते हैं कि आपके मस्तिष्क में समस्या कहा पर है।आप रिजल्ट के साथ अपने डॉक्टर से मिल सकते हैं। किसी भी तरह की समस्या होने पर आप हेल्थ प्रोफेशनल से तुरंत बात करें। यदि मरगी या अन्य किसी दिमागी विकार के कारण,असामान्य ,ब्लीडिंग या हैमरेज,स्लीप डिसऑर्डर,एन्सेफेलाइटिस,ट्यूमर,माइग्रेन मृत कोशिकाएं जिन्होंने रक्त संचार को ब्लॉक कर दिया है, सिर में चोट लगने के कारण, ज्यादा एल्कोहॉल या ड्रग का सेवन करने से रिर्पोट असामान्य आती है तो रोगी की स्थिति को जांचते हुए समय रहते इलाज शुरू किया जा सकेगा।

जानिए जरूरी बातें

श्री साई अस्पताल के न्यूरों सर्जन डॉ वरूण गर्ग ने बताया कि इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम कराने में किसी तरह का कोई रिस्क नहीं है। ये पूरी तरह सुरक्षित और दर्दरहित होता है। कुछ इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम में लाइट या स्टिमुलाई नहीं होते है। ऐसा तब होता है जब टेस्ट में किसी भी तरह की असमान्यता नजर न आए। क्योंकि इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम में इस्तेमाल होने वाली लाइट अबनॉर्मलिटीज को बढ़ावा देती है। अगर किसी को मिरगी या कब्जा विकार है तो स्टिमुलाई का इस्तेमाल किया जाता है।

क्या है ईईजी टेस्ट की प्रक्रिया


न्यूरों सर्जन वरूण गर्ग बताते है कि इस टेस्ट से पहले बालों को अच्छे से धुल कर साफ कर लें। इसके अलावा बालों में किसी भी तरह का कोई भी प्रोडक्ट इस्तेमाल न करें। इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम टेस्ट कराने से पहले आपको डॉक्टर से अपने द्वारा ली जा रही दवाओं के बारे में जरूर बताना चाहिए। टेस्ट कराने से कितने समय पहले से आपको खान-पीना बंद कर देना है इस बात की जानकारी जरूर  लें। इसके अलावा डॉक्टर आपको इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम टेस्ट के एक रात पहले बहुत कम सोने के लिए कह सकते हैं। क्योंकि टेस्ट के दौरान आपके मस्तिष्क को रिलेक्स पोजीशन में रहने की जरूरत होती है। टेस्ट के बाद आप अपनी दिनचर्या को सामान्य रूप से शुरू कर सकते हैं। लेकिन, टेस्ट कराने हॉस्पिटल जाते समय अपने किसी परिजन को साथ में लें।

 

कितने समय में होगा टेस्ट

इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम टेस्ट को करने में लगभग 60 मिनट का समय लगता है। बालों के जड़ों में इलेक्ट्रोड्स को चिपकाने के लिए एक विशेष प्रकार के ग्लू का इस्तेमाल किया जाता है। इस डिस्क के तार कंप्यूटर के मॉनीटर से जुड़े रहेंगे। एक बार इलेक्ट्रोड आपके सिर पर चिपकाने के बाद आपको सोने के लिए कहा जाएगा। कभी-कभी टेस्ट के बीच में टेक्नीशियन आपको आंखें खोलने या बंद करने के लिए कहते हैं। ताकि मस्तिष्क की तरंगों को सही तरीके से माप सके। इसके साथ ही टेस्ट के दौरान आपको किसी आसान से सवाल को हल करने के लिए कहा जा सकता है। साथ ही किसी पैराग्राफ को पढऩे, चित्र को देखने, गहरी व लंबी सांस लेने के लिए कहा जा सकता है।

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