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November 27, 2020 News

हिमाचल प्रदेश बना टॉप हॉटस्पॉट

कोरोना के प्रति सजग हों सभी सिरमौरवासी
निभाएं अपनी ज़िम्मेदारी
अपना और अपनों का कोविड टैस्ट जरूर करवाएं

कोरोना की जंग अभी जारी है… घबराएं नहीं हमारी पूरी तैयारी है

सिरमौरवासियों से अपील 

                               हम सब पिछले सात – आठ महीनों से कोविड बीमारी से लड़ रहे है। सरकार द्वारा लॉक डाउन लगाया गया और हम सब नागरिकों ने उसका पालन किया। हमें बहुत परेशानियां आई , सब ने इन परेशानियों का सामना किया और इस महामारी का डट कर मुकाबला किया। कुछ हद तक सरकार ने मदद की और कुछ हम सब ने कोशिश की, की हम इस सब से बाहर आ सकें।  सितम्बर माह के अंत में ऐसा लगा था की ये बीमारी अब ख़त्म हो जाएगी और ये सोच कर सब लापरवाह हो गए। लोगों ने मास्क पहनना बंद कर दिया, टैस्ट करवाने से बचने लगे। खुद को लक्षण होने पर भी समारोह में गए , सबके बीच रह कर त्यौहार मनाये। जिन परिवारों में कोरोना के कारण किसी की मृत्यु हुई उन्होंने भी छुपाया। पर इन सब बातों से आज हम एक खतरनाक परिस्थिति में पहुँच गयें है। आज हमें जागना होगा, मिल कर इस से लड़ना होगा। सरकार का और सारे सिस्टम का साथ देना होगा। इस महामारी को ख़त्म करने के लिए। आपकी इस कोशिश में श्री साईं हॉस्पिटल आपके साथ हैं। पिछले कई दिनों से हमारे सिरमौर वासिओं को कोविड टैस्ट की सुविधा, जल्दी रिपोर्ट के साथ घर पर ही उपलब्ध करवाई जा रही है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए 4 इनवेसिव एवं 7 नॉन इनवेसिव वेंटीलेटर उपलब्ध है और हमारे हॉस्पिटल की टीम 24 घंटे आपकी सेवा में तत्पर है। ये सब सुविधा बड़े शहरों की अपेक्षा आधे से कम चार्ज में उपलब्ध है। हर मरीज की कंडीशन और वित्तीय स्थिति के अनुसार इलाज उपलब्ध है। आयुष्मान और हिम कार्ड धारक मरीजों को कैश लेस सुविधा है। आपका अपना श्री साईं हॉस्पिटल नाहन , हिमाचल प्रदेश का एक मात्र प्राइवेट हॉस्पिटल है जहाँ ये स्पेशलिज़्ड सुविधा ,NABL और ICMR से मान्यता प्राप्त 24×7 लैब की सुविधा के साथ दी जा रही है। हम 24×7 आपकी मदद के लिए तत्पर है। इस बीमारी से लड़ने के लिए आपका अपना हॉस्पिटल पूरी तरहां से तैयार है , इसलिए घबराएं नहीं।

टैस्ट जरूर करवाएं , इससे डरें नहीं। अपने लिए न सही , हमारे अपने बड़ों और बच्चों के लिए , समय पर टैस्ट करवाएं।

अपीलकर्ता
डॉ दिनेश बेदी निदेशक,
श्री साई हॉस्पिटल , नाहन
आपका अस्पताल सदा के लिए

कोरोना की इस जंग में हम है आपके साथ

 



November 24, 2020 News

रीना सिस्टर व संदीप बने “बेस्ट एम्प्लॉई ऑफ़ द मंथ”

श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर , नाहन में अक्टूबर माह के सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी का चयन किया गया। इस माह श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर , नाहन में कार्येरत रीना व संदीप को “बेस्ट एम्प्लॉई ऑफ़ द मंथ” के ख़िताब से नवाजा गया। रीना सिस्टर नर्स के पद पर अपनी सेवाएं दे रहें है जबकि संदीप श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर , नाहन में फ्रंट ऑफिस एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत है।

 

रीना सिस्टर

 

संदीप , फ्रंट ऑफिस एग्जीक्यूटिव 

 

अक्टूबर माह में उत्कृष्ट कार्य करने पर इन दोनों का नाम चयनित किया गया। इस अवसर पर श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर , नाहन के निदेशक डॉ दिनेश बेदी जी ने सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी चयनित होने पर दोनों को बधाई दी व् सभी कर्मचारियों को आगे आने वाले समय में सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी बनने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने ने कहा की व्यक्ति किसी भी कार्य से जुड़ा हो उसे अपने कर्म क्षेत्र के साथ हमेशा ईमानदारी बरतनी चाहिए यही एक सफल व्यक्ति का मूल मन्त्र है।

सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी कार्येक्रम का आयोजन आज श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर , नाहन के सभागार में किया गया। सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी को प्रशश्ति पत्र एवं ट्रॉफी उपहार स्वरुप दिया गया।



November 20, 2020 News

बवासीर जिसे पाइल्स एवं अर्श रोग भी कहा जाता है। ये रोग बेहद तकलीफदेह होता है। इस समस्या में रोगी को गंभीर कब्ज तो होती ही है, साथ ही मलद्वार में असहनीय तकलीफ, कांटों सी चुभन, मस्से एवं घाव, जलन आदि गंभीर समस्याएं होती हैं और मल द्वारा खून भी बहता है जो रोगी को कमजोर बना देती हैं।
आमतौर पर बवासीर 45 साल से 65 साल के लोगों में होने वाली बेहद सामान्य बीमारी होती है, लेकिन गलत लाइफस्टाइल की वजह से अब ये बीमारी 35-45 की उम्र के लोगों में भी होने लगी है। ऐसे में जरुरी परहेज के अलावा बवासीर रोगी को अपने खान पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जिससे समस्या को बढ़ने से रोका जा सके। श्री साईं मल्टीस्पेसलैटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर , नाहन में डाइट कंसलटेंट प्रिया शर्मा ने बवासीर रोगियों को कैसी डाइट फॉलो करनी चाइये इस विषय पर जानकारी दी।

Priya Sharma
MSc. Dietitics & Food Management
Diet Consultant

बवासीर के लिए सहायक खाद्य पदार्थ।
बवासीर से बचने या रोकने की कोशिश करते समय, एक प्रमुख नियम यह सुनिश्चित करना है कि आपको पर्याप्त फाइबर मिल रहा है
फलियां – व सेम, दाल, मटर, सोयाबीन, मूंगफली, और छोले शामिल हैं। यह रक्तस्राव को रोकने या लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है
साबुत अनाज-
फलियों की तरह, साबुत अनाज पोषण संबंधी पावरहाउस हैं। इस श्रेणी में जौ, मक्का, ब्राउन राइस, पूरी राई और जई भी शामिल हैं। जब आप बवासीर के लक्षणों को कम करने की कोशिश कर रहे हों तो दलिया अपने आहार में शामिल करने के लिए एक विशेष रूप से अच्छा विकल्प है।
पत्तेदार सब्जियां –
पत्तेदार सब्जियों में ब्रोकोली, फूलगोभी, मूली, शलजम और गोभी शामिल हैं
जड़ वाली सब्जियां-
शकरकंद, शलजम, बीट, गाजर, और आलू पोषण से भरे और भरे हुए हैं।
चूंकि यह कब्ज को कम करता है, यह बवासीर के लक्षणों को कम कर सकता है। फल सेब, केला फाइबर की एक प्रभावशाली मात्रा को बढ़ाएं। यह आपके मल को नरम करने में मदद करता है, तनाव को कम करता है और बवासीर से जुड़ी असुविधा को दूर करता है।

तरल पदार्थ
तरल पदार्थ-खुद को हाइड्रेटेड रखना , मल को नरम बनाने और आसान मॉल त्यागने में मदद मिलेगी।

किन खाद्य पदार्थों से बचा जाना चाहिए ?

कम फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करना एक अच्छा विचार है। ये कब्ज को और बढ़ा सकते हैं जो बवासीर को ट्रिगर कर सकते हैं।

दुग्ध उत्पाद- इनमें दूध, पनीर और अन्य किस्में शामिल हैं।
सफ़ेद आटा इस तरह के आटे से बने उत्पादों में सफेद ब्रेड, पास्ता शामिल हैं।
लाल मांस –  इस प्रकार के मांस से बचें, क्योंकि यह पचने में अधिक समय लेता है और कब्ज को बढ़ा सकता है।

तले हुए खाद्य पदार्थ- ये आपके पाचन तंत्र पर कठोर और पचाने में मुश्किल हो सकते हैं।

नमकीन खाद्य पदार्थ- वे सूजन का कारण बन सकते हैं और आपके बवासीर को अधिक संवेदनशील बना सकते हैं।
मसालेदार भोजन- मसालेदार भोजन बवासीर से जुड़े दर्द और परेशानी को बढ़ा सकता है।
कैफीन युक्त पेय- ये पेय, विशेष रूप से कॉफी, आपके मल को कठोर कर सकते हैं और वॉशरूम के दौरान इसे और अधिक दर्दनाक बना सकते हैं
शराब- मादक पेय आपके मल को सूख सकते हैं और बवासीर की परेशानी को बढ़ा सकते हैं।

अपने खान पान पर विशेष धयान रख कर आप बवासीर को शुरू होने से पहले ही ख़तम कर सकते है। आप हम से मिल कर अपनी डाइट चार्ट बनवा सकते है। डाइट कंसलटेंट प्रिय शर्मा , प्रतिदिन श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहें है।


November 18, 2020 News

 

 श्री साई मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर, नाहन की लेबोरेटरी सर्विस / मॉलिक्युलर लैब को क्वालिटी कौंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा नेशनल एक्रिडिशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एन्ड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज से एक्रिडिशन प्राप्त हो गयी है। अंतराष्ट्रीय स्तर के मानकों पर आधारित टेस्ट रिपोर्ट अब नाहन में ही उपलब्ध होगी। किसी भी बीमारी में सबसे महतवपूर्ण होता है उस बीमारी से सम्बंधित टेस्ट, एन0 ए0 बी 0 एल ० द्वारा मान्यता प्राप्त लैब में अब आपको ज्यादा सटीक रिजल्ट प्राप्त होंगें, जिस से बीमारी में बेहतर इलाज की सम्भावनायें और जयादा बढ़ जाएगी। इस विषय पर जानकारी देते हुए श्री साई मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर, नाहन के निदेशक डॉ. दिनेश बेदी ने बताया की श्री साई मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर, नाहन की लैब एन0 ए0 बी 0 एल ० द्वारा मान्यता प्राप्त लैब बनने वाली जिला सिरमौर की पहली मेडिकल लैब है। हमारी लैब को एन0 ए0 बी 0 एल ० द्वारा मान्यता प्राप्त होने के बाद हमारी जिम्मेबारी और जयादा बढ़ जाती है। हम पूरी कोशिश कर रहें है की जिला सिरमौर में दिन प्रतिदिन बेहतरीन स्वस्थ सेवाएं हम अपने सिरमौर निवासिओं को उपलब्ध करवाएं। एन0 ए0 बी 0 एल ० द्वारा मान्यता प्राप्त लैब में मरीजों विश्वश्नीये व् स्टिक टेस्ट रिपोर्ट के परिणाम प्राप्त होंगे। किसी बीमारी के विषय में जांच में अब बार बार टेस्ट की आवश्यकता नहीं होगी जिस से की समय एवं पैसे की बचत होगी।


November 12, 2020 News

                           

 श्री साई मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रॉमा सेंटर नाहन के नेत्र विभाग श्री साई ऑप्टिकल्स में 11 से 20 नवंबर 2020 तक चश्मों के फ्रेम पर एक के साथ एक फ्रेम फ्री का ऑफर दिया जा रहा है। इस ऑफर के तहत जिस भी व्यक्ति को नजर का चश्मा बनवाना हो , उनकी आँखों की निशुल्क जांच की जाएगी और एक चश्मे की फ्रेम पर दूसरी फ्रेम निशुल्क है। संजय धीमान ऑप्टोमेट्रिस्ट ने बताया की श्री साई ऑप्टिकल्स, नाहन में  दिवाली के उपलक्ष्य पर एक फ्रेम पर एक फ्रेम फ्री का ऑफर है। साथ ही ब्रांडेड फ्रेम्स पर 15 % डिस्काउंट , ब्रांडेड लेन्सेस जैसे क्रिजाल पर 10 % डिस्काउंट है और कांटेक्ट लेन्सेस पर 15 % डिस्काउंट दिया जा रहा है। यह ऑफर 11 से 20 नवंबर तक रहेगा।

 इस के साथ ही उन्होंने बताया की आँखों से सम्बंधित रोगो की जांच व इलाज किया जाता है। आँखों से सम्बंधित बीमारियां जैसे मोतियाबिंद, काला मोतियाबिंद, भैंगापन (तिरछापन),पलकों का गिरना व् मुड़ना, नज़र की जांच, नाखून एवं बाल नेत्र रोग आदि सभी रोगों का सफलता पूर्वक इलाज किया जा रहा है।नेत्र विभाग में प्रतिदिन आँखों की जांच की जाती है और प्रत्येक गुरूवार को नेत्र सम्बंधित रोगों की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पी के मांझी द्वारा सर्जरी कर इलाज किया जाता है। दिवाली के उपलक्ष्य पर जिला सिरमौर के निवासी इस ऑफर का लाभ ले सकते हैं।



November 9, 2020 News

मोटापा घटाने का आसान तरीका – बेरियाट्रिक सर्जरी 

       कहते है मोटापा अपने साथ बिमारिओं को ले कर आता है। मोटापे के कारण शुगर , बी पी, घुटनों में दर्द, बांझपन आदि रोग उत्पन हो जाते हैं और शरीर बिमारिओं का घर बन जाता है।
वजन बढ़ तो आसानी से जाता है लेकिन घटाने में बहुत मेहनत लगती है। वजन कम करने के लिए बहुत सारे उपायों जैसे डायटिंग, जिम जॉइन करना, योगा करना इत्यादि को अपनाते हैं, लेकिन फिर भी उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं होता है क्योंकि वे इसे पूर्ण रूप से अपना नहीं पाते हैं और इस समस्या से परेशान रहते हैं। इस स्थिति में उनकी समस्या का समाधान केवल बेरियाट्रिक सर्जरी से ही किया जा सकता है।

यदि आप अपने मोटापे से परेशान है , लाख कोशिशों के बाद भी वजन कम नहीं कर पा रहे। तो बेरियाट्रिक सर्जरी यानी मोटापा काम करने की सर्जरी आपके पतले होने के सपने को सच कर सकती है।


श्री साईं हॉस्पिटल के बेरियाट्रिक / मेटाबोलिक सर्जरी सेंटर में मोटापा कम करने की बेरियाट्रिक सर्जरी सफलता पूर्वक की गयी। तीन महीने पहले डॉ दिनेश बेदी द्वारा की गयी सर्जरी में आज फॉलो अप में रोगी को बिलकुल स्वस्थ पाया गया। इस सर्जरी से पूर्व व्यक्ति का वजन 135 किलो था और सर्जरी के बाद तीन महीनो में व्यक्ति का वजन 100 किलो हो गया। मात्र तीन महीने के समय में 35 किलो वजन कम किया।


डॉ दिनेश बेदी ने बताया की इस केस में रोगी बहुत सालों से मोटापे से परेशान था। उसका वजन लगभग 135 किलो था और वजन कम करने के सारे प्रयास विफल हो रहे थे। लाख कोशिशों के बाद जब वजन काम नहीं कर पाए तो उन्हें बेरियाट्रिक सर्जरी की सलाह दी गयी। तीन महीने पहले उनकी बेरियाट्रिक सर्जरी की गयी और आज उनका वजन 100 किलो हो गया है। उनकी वैस्ट लाइन भी कम हुई। इस केस में गैस्ट्रिक स्लीव सर्जरी की गयी। गैस्ट्रिक स्लीव सर्जरी उस व्यक्ति पर किया जाता है, जो अत्याधिक मोटापे की समस्या से पीड़ित होता है। गैस्ट्रिक स्लीव सर्जरी में लैपरोस्कोपी उपकरण का उपयोग किया जाता है और उसकी सहायता से पेट के आकार को कम किया जाता है। अब इस सर्जरी की सुविधा श्री साई हॉस्पिटल के नाहन और अम्बाला कैंट सेंटर में उपलब्ध है।

यदि आप मोटापे से पीड़ित है बेरियाट्रिक सर्जरी के बारे में और अधिक जानना चाहते है तो संपर्क करे डॉ दिनेश बेदी , लप्रोस्कोपिक सर्जन से।



October 30, 2020 News

आंखों, दांतो व अन्य रोगों के लिए जनरल फिजिशियन की निशुल्क ओपीडी का भी उठाए लाभ

नाहन
श्री साई अस्पताल नाहन की कालाअंब ब्रांच श्री साई पॉली क्लीनिक (त्रिलोकपुर रोड़, सब्जी मंडी के समीप स्थित) कालाअंब में आगामी रविवार 1 नवबंर को सभी ओपीडी निशुल्क की जा रही है। जिसका समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहेगा। जिसमें मुख्य तौर पर नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ अनूप रॉय व चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ साहिल परुथी, जनरल फिजिशियन डॉ निशा शर्मा की ओपीडी भी आयोजित की जाएगी।

 

चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ साहिल परूथी की ओपीडी निशुल्क



जिसमें चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ साहिल परूथी की ओपीडी में कील मुहासों, दाद खाज एवं खुजली, चेहरे का कालापन, आंखो के नीचे काले घेरे, रूखी त्वचा व ऑयली त्वचा आदि समस्याओं की जांच निशुल्क करवा सकते है।

नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ अनूप रॉय की ओपीडी निशुल्क

वही नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ अनूप रॉय की ओपीडी में साइनेस, कान के पर्दे के पीछे की बीमारियों की जांच, कान, नाक व गले का उपचार, एलर्जी का उपचार व कान गला संबधि अन्य रोगों की जांच निशुल्क करवा सकते है।

 

नियमित रूप से चलने वाले आंख,  दांत संबधि रोग की जांच निशुल्क

इसके अलावा नियमित रूप से चलने वाले आंखों की जांच जैसे मोतियाबिंद, बाल नेत्र जांच, कालाअंब मोतियाबिंद, पलको का मुडऩा, नजर की जांच नाखुना व भैंगापना की जांच भी निशुल्क रहेगी। साथ ही दांत संबधि रोग की जांच भी निशुल्क ही की जाएगी।

जनरल फिजिशियन डॉ निशा शर्मा

की ओपीडी निशुल्क

इसके अलावा जनरल फिजिशियन डॉ निशा शर्मा द्वारा ह्रदय रोग, बीपी, संास संबधि रोग, थकान रहना, थायरॉड,पेट का बार बार दर्द रहना, जिगर संबधि विकार व सुगर इत्यादि विभिन्न रोगों की जांच निशुल्क की जाएगी।
जानकारी देते हुए कालाअंब श्री साई पॉली क्लीनिक कालाअंब के इंजार्च एवं मार्कटिंग हेड ने लक्ष्य ने बताया कि कालाअंब के पॉली क्लीनिक में प्रत्येक रविवार को गंभीर रोगों से संबधित विशेषज्ञों की ओपीडी निशुल्क रहती है। जिसका लाभ कालाअंब व आस पास के क्षेत्र के निवासी उठा सकते है। उन्होने कहा कि कालाअंब के क्षेत्र में गरीब तबके को भी अस्पताल की उच्च स्तरीय सुविधाओं का लाभ निशुल्क मिले, इसके लिए प्रत्येक रविवार को विभिन्न रोगों संबधि विशेषज्ञों की ओपीडी निशुल्क आयोजित की जाती है, ताकि अवकाश के दिन रोगी को बाहरी राज्यों में मंहगे दामों पर इलाज के लिए न भटकना पड़ें।

What causes miscarriage ! अचानक ही गर्भपात होने वाली समस्या से बचना चाहती है तो जानिएं ये लक्षण।



October 21, 2020 EventNews

प्रत्येक शुक्रवार को दिमाग संबधि रोगों के लिए ईईजी टेस्ट सुविधा का लाभ उठाएं

नाहन
श्री साई अस्पताल नाहन में अब दिमागी रोगों संबधि एक ओर सुविधा को उपलब्ध करवाया जा रहा है, अब दिमागी रोगों का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम (ईईजी) टेस्ट की सुविधा श्री साई अस्पताल नाहन में मुहैया करवा दी गई है। इस सुविधा के लिए लोगों को अब बाहरी राज्यों में भटकने की आवश्यकता नही होगी। ये टेस्ट प्रत्येक शुक्रवार को श्री साई अस्पताल में किफायती दरों पर किया जा रहा है। इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम (ईईजी) टेस्ट ब्रेन यानी कि मस्तिष्क से संबंधित टेस्ट है। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क के इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को जानना है। क्योंकि ब्रेन सेल्स एक दूसरे से इलेक्ट्रिक इम्पल्स के द्वारा संपर्क करती हैं। जब ये कोशिकाएं आपस में संपर्क नहीं कर पाती हैं तो इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम टेस्ट की जरूरत पड़ती है। जानकारी देते हुए श्री साई अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ वरूण गर्ग ने बताया कि इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम मस्तिष्क के तरंगों के पैटर्न को रिकॉर्ड करता है। छोटे, चपटे मेटल के डिस्क का इस्तेमाल इस टेस्ट में किया जाता। दिमागी रोगों की गहनता से जांच हेतु ईईजी टेस्ट अत्यंत जरूरी होता है।

कब है जरूरत?




इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम को तब किया जाता है जब ब्रेन डिसऑर्डर के लक्षण सामने आते हैं। जैसे- मिरगी आना, ब्रेन ट्यूमर, सिर में चोट के कारण ब्रेन डैमेज हो जाना, एन्सेफेलोपैथी, यानी कि कई कारणों से मस्तिष्क का सही से काम न करन, ब्रेन में जलन या दर्द होना, स्ट्रोक,स्लीप डिसऑर्डर के साथ साथ इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम का इस्तेमाल कोमा में गए हुए व्यक्ति में ब्रेन डेड को कंफर्म करने के लिए भी किया जाता है।

जानिए जरूरी बातें

श्री साई अस्पताल के न्यूरों सर्जन डॉ वरूण गर्ग ने बताया कि इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम कराने में किसी तरह का कोई रिस्क नहीं है। ये पूरी तरह सुरक्षित और दर्दरहित होता है। कुछ इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम में लाइट या स्टिमुलाई नहीं होते है। ऐसा तब होता है जब टेस्ट में किसी भी तरह की असमान्यता नजर न आए। क्योंकि इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम में इस्तेमाल होने वाली लाइट अबनॉर्मलिटीज को बढ़ावा देती है। अगर किसी को मिरगी या कब्जा विकार है तो स्टिमुलाई का इस्तेमाल किया जाता है।

क्या है ईईजी टेस्ट की प्रक्रिया

न्यूरों सर्जन वरूण गर्ग बताते है कि इस टेस्ट से पहले बालों को अच्छे से धुल कर साफ कर लें। इसके अलावा बालों में किसी भी तरह का कोई भी प्रोडक्ट इस्तेमाल न करें। इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम टेस्ट कराने से पहले आपको डॉक्टर से अपने द्वारा ली जा रही दवाओं के बारे में जरूर बताना चाहिए। टेस्ट कराने से कितने समय पहले से आपको खान-पीना बंद कर देना है इस बात की जानकारी जरूर लें। इसके अलावा डॉक्टर आपको इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम टेस्ट के एक रात पहले बहुत कम सोने के लिए कह सकते हैं। क्योंकि टेस्ट के दौरान आपके मस्तिष्क को रिलेक्स पोजीशन में रहने की जरूरत होती है। टेस्ट के बाद आप अपनी दिनचर्या को सामान्य रूप से शुरू कर सकते हैं। लेकिन, टेस्ट कराने हॉस्पिटल जाते समय अपने किसी परिजन को साथ में लें।

 

कितने समय में होगा टेस्ट



इलेक्ट्रो एन्सेफेलोग्राम टेस्ट को करने में लगभग 60 मिनट का समय लगता है। बालों के जड़ों में इलेक्ट्रोड्स को चिपकाने के लिए एक विशेष प्रकार के ग्लू का इस्तेमाल किया जाता है। इस डिस्क के तार कंप्यूटर के मॉनीटर से जुड़े रहेंगे। एक बार इलेक्ट्रोड आपके सिर पर चिपकाने के बाद आपको सोने के लिए कहा जाएगा। कभी-कभी टेस्ट के बीच में टेक्नीशियन आपको आंखें खोलने या बंद करने के लिए कहते हैं। ताकि मस्तिष्क की तरंगों को सही तरीके से माप सके। इसके साथ ही टेस्ट के दौरान आपको किसी आसान से सवाल को हल करने के लिए कहा जा सकता है। साथ ही किसी पैराग्राफ को पढऩे, चित्र को देखने, गहरी व लंबी सांस लेने के लिए कहा जा सकता है। इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम में अपने आप आपके मस्तिष्क तरंगों का वीडियो रिकॉर्ड हो जाता है। इन्हीं तरंगों के आधार पर डॉक्टर पता करते हैं कि आपके मस्तिष्क में समस्या कहा पर है।आप रिजल्ट के साथ अपने डॉक्टर से मिल सकते हैं। किसी भी तरह की समस्या होने पर आप हेल्थ प्रोफेशनल से तुरंत बात करें। यदि मरगी या अन्य किसी दिमागी विकार के कारण,असामान्य ,ब्लीडिंग या हैमरेज,स्लीप डिसऑर्डर,एन्सेफेलाइटिस,ट्यूमर,माइग्रेन मृत कोशिकाएं जिन्होंने रक्त संचार को ब्लॉक कर दिया है, सिर में चोट लगने के कारण, ज्यादा एल्कोहॉल या ड्रग का सेवन करने से रिर्पोट असामान्य आती है तो रोगी की स्थिति को जांचते हुए समय रहते इलाज शुरू किया जा सकेगा।

Safety is our No1 Priority, ठंड से कैसे बचायें मासूम शिशुओंं को, बता रहें है श्री साई अस्पताल नाहन के विशेषज्ञ


October 17, 2020 News

ठंड से कैसे बचायें मासूम शिशुओंं को, पढिय़े ये स्वास्थ टिप्स

 

श्री साई अस्पताल नाहन के विशेषज्ञ बता रहें है, कैसे रखें अपने नवजात शिशुओं का ख्याल

नाहन
बारिश के बाद मौसम बदलने के साथ ही अब ठण्ड का अहसास होने लगा है। मौसम में आने वाले इस बदलाव को महसूस करके सभी लोग ठंड से बचने के प्रयास करना शुरू कर देते हैं। लेकिन ऐसे में नवजात शशिु की समस्या बढऩे लगती है। क्योंकि दूधमुंहे बच्चें चाहकर भी अपनी पीड़ा किसी को बता नहीं सकते हैं। मौसम की ठंड और हवा से बचाने के लिए शिशु को सही तरह से ढकना या कपड़े पहनाना जरूरी होता है।

सिर को ढकना है जरूरी

नवजात शिशु के सिर को हर समय ढककर रखना चाहिए। इसका कारण यह है कि सिर का तापमान अगर कम होता है, तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। इसलिए बच्चे को ठंड से बचाने के लिए टोपी पहनाएं या सिर को किसी कपड़े से ढककर रखें। यह भी ध्यान रखें कि शिशु की टोपी ज्यादा टाइट न हो और मुलायम कपड़े की हो।

तलवों से भी लग सकती है ठंड

हमारे शरीर का तापमान कंट्रोल करने में तलवे बड़े महत्वपूर्ण होते हैं। नन्हे शिशु भले ही सारे समय बिस्तर पर लेटे रहते हैं और जमीन पर पैर नहीं रखते हैं, फिर भी उन्हें तलवों से ठंड लग सकती है। इसलिए शिशु को मोजा पहनाना या पैरों की तरफ कपड़ा लपेटना जरूरी है। मोजा पहनाने से शिशु के तलवों के साथ-साथ पूरे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।

नाक को गर्म रखें


नाक एक महत्वपूर्ण अंग है। ज्यादातर जम्र्स, बैक्टीरिया और हानिकारक धुंआ आदि शिशु के नाक के रास्ते ही उसके शरीर में प्रवेश करते हैं। इसलिए शिशु के नाक की सुरक्षा करनी भी जरूरी है। मगर इसके लिए आपको शिशु की नाक को ढकना नहीं है, क्योंकि बहुत महीन कपड़ा भी उसको सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकता है। इसके बजाय यह करें कि शिशु की नाक को बीच-बीच में गर्म हाथों से सिंकाई करें या गर्म तेल से मसाज करें। कोशिश करें कि कमरे का तापमान बहुत कम न हो।

हाथों से ठंड

ठंड के मौसम में शिशु को कई बार हाथों से भी ठंड लग जाती है। इसलिए शिशु को हाथों में मुलायम दस्ताने पहनाएं और पूरी बांह के कपड़े पहनाएं। लेकिन ध्यान रखें कि रात में सुलाते समय शिशु के शरीर को (मुंह नहीं) कंबल से ढकें, तब दस्ताने न पहनाएं, अन्यथा शिशु की नींद प्रभावित हो सकती है।

शरीर को गर्म रखने के लिए मसाज करें


शिशु के शरीर को गर्म रखने के लिए तेल की मसाज बहुत फायदेमंद होती है। ठंडे मौसम में शिशु की मसाज के लिए सरसों का तेल बेस्ट होता है। अगर आपके शिशु को हल्की जुकाम या सर्दी लगने के लक्षण हैं तो आप सरसों के तेल में ही अजवायन और कटे हुए लहसुन के टुकड़े गर्म करके उस तेल से मालिश करें। दिन में कम से कम 1 बार मालिश करना जरूरी है। लेकिन इसके लिए बहुत सुबह या बहुत रात का समय न चुनें। सबसे अच्छा समय है कि आप धूप में शिशु को लेकर उसके सारे कपड़े उतारकर मालिश करें, ताकि उसे ठंड भी न लगे और शरीर की मालिश भी हो जाए।
What causes miscarriage ! अचानक  ही गर्भपात होने वाली समस्या से बचना चाहती है तो जानिएं ये लक्षण।


October 14, 2020 News

 

बार बार होने वाले गर्भपात की समस्या बचने के लिए तुरंत करवाएं इलाज।


नाहन, 
आधुनिक जीवन में खान पान व सुविधाओं की भरमार के चलते हम सभी के स्वास्थ में काफी तब्दीलियां आ रही है। वही गर्भ धारण करने में महिलाओ को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश महिलाओं को बार-बार गर्भपात होने की समस्या से जूझना पड़ रहा है। कई बार तो महिलाओं को पता ही नहीं चल पाता कि वे गर्भवती हो गई है। इस बात से बेखबर वे आम दिनों कि तरह दिनचर्या बीता रही होती है। कई तरह की बातों का तनाव होना तो आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सामान्य सा हो गया है। ऐसे में यह देखने में आता है कि कई बार महिलाओं का गर्भपात हो जाता है, वो भी ऐसे वक्त जब उन्हें पता भी नहीं होता कि वे गर्भवती थी। बार बार गर्भपात की होने की लक्षणों के बारे में बता रहीं है श्री साई अस्तताल की वरिष्ठ बांझपन व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ श्रद्वा बेदी। वह बताती है कि कई मामलों में प्रेगनेंसी के 15 हफ्ते के भीतर ही गर्भपात हो जाता है और महिलाओं को पता भी नहीं चल पाता। ऐसे में जरूरी है कि महिलाओं को गर्भपात यानी की एबॉर्शन होने के लक्षणों के बारें में बताया जाए, जिससे इस तरह का कोई भी संकेत मिलने पर वे तुरंत डॉक्टर के पास जा सके।

किसी भी प्रकार के रक्तसा्रव को न करेें नजर अंदाज


गर्भावस्था के शुरूवाती दिनों में यदि आपको रक्तसा्रव हो रहा है, तो इसका मतलब गर्भपात ही हो ऐसा जरूरी नहीं। आमतौर पर शुरूवाती दिनों में हल्की ब्लीडिंग होना सामान्य होता है लेकिन चिंताजनक तब हैं जब आपको स्पॉटिंग या थक्को के साथ ज्यादा ब्लीडिंग हो और ब्लीडिंग के दौरान ब्लड का रंग भूरा या गहरा लाल हो। तो ऐसी परिस्थिति में तुरंत ही अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। जिससे समय रहते गर्भपात की समस्या को दूर किया जा सकें।

पेल्विक ऐरियां में दबाव


महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान पेल्विक एरिया के आस-पास हल्का सा दबाव पडऩे लगता है। प्रसव होने से पूर्व वाला संकुचन जैसा भी उन्हें लगने लगता है। इसका मतलब है कि आपका गर्भाशय ग्रीवा कमज़ोर हो रहा है। शुरुआती महीनों में इस तरह का संकुचन नहीं होना चाहिए ऐसा होने पर यह भी गर्भपात का संकेत हो सकता है। कई बार हल्की ब्लीडिंग और दर्द के बाद भी गर्भपात के और कोई लक्षण न दिखें, तो ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कई बार आधा गर्भपात हो जाता है और आधा अंदर ही रह जाता है ऐसे में पूरा गर्भपात डॉक्टर से कराना आवशयक है, नहीं तो आपकी सेहत को बढ़ा नुकसान हो सकता है।

पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द होना

 
बैक पेन व पीठ के नीचले हिस्से में दर्द होना गर्भपात का संकेत हो सकता है। प्रेगनेंसीमें वाइट डिस्चार्ज होना सामान्य है, लेकिन यदि इसमें से किसी प्रकार की गंध आए, तो यह किसी तरह का इन्फेक्शन हो सकता है।
यदि आप इनमें से किसी प्रकार की समस्या को महसूस कर रही है, तो बिना देरी किए अपनी डॉक्टर से जांच करवाएं। विदित हो कि श्री साई अस्पताल नाहन में ऐसी समस्याओं को लेकर 24 घंटे सुविधा उपलब्ध है। जिसमें अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुविधि परूथी द्वारा सोमवार से शनिवार तक गर्भवति महिलाओं की जांच की जाती है वही प्रत्येक गुरूवार को वरिष्ठ गाइनोक्लोजिस्ट डॉ श्रद्धा बेदी द्वारा गर्भ से संंबधित समस्याओं का इलाज किया जा रहा है।
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