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श्री साई मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में उपलब्ध है लेवल 2 अल्ट्रासाऊड की सुविधा, बच्चे की बोन्स, ब्रेन व हार्ट के लिए जरूर करवाए लेवल 2 अल्ट्रासाऊड

September 30, 2019
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श्री साई मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में उपलब्ध है लेवल 2 अल्ट्रासाऊड की सुविधा
गर्भ में बच्चे की हर अंग की जांच के लिए आवश्यक है लेवल 2 अल्ट्रासांऊड
श्री साई अस्पताल की गाइनोकोलोजिस्ट डॉ रितिका दिनानाथ बताती है बच्चे की बोन्स, ब्रेन व हार्ट के लिए जरूर करवाए लेवल 2 अल्ट्रासाऊड

श्री साई मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल एंव ट्रामा सेंटर में सुपर स्पेशलिटी सुविधाए मुहैया करवाई जा रही है जहंा प्रेगनेनसी से लेकर महिलाओं के लिए हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है। प्रैगनेनसी में बच्चे की हर गतिविधियों व गर्भवस्था के दौरान आने वाली समस्याओं से बचाव के लिए कई प्रकार की सुविधाए अस्पताल में उपलब्ध है जिसमें से एक मुख्य है लेवल 2 का अल्ट्रासांऊड। श्री साई अस्पताल की स्त्री रोग व प्रसूति विशेषज्ञ डॉ रितिका दिनानाथ का बताती है कि आज के समय में खानपान व फास्ट लाइफ के कारण गर्भावस्था के दौरान चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहें है। जिसमें बच्चे का गर्भ में पूर्ण विकास न हो पाना, किसी अंग का विकसित न हो पाना, ब्रेन का विकास रूक जाना बच्चे के हार्ट में कोई समस्या आदि जिसके कारण ऐसी प्रेंगननसी का पता लगाने के लिए लेवल 2 अल्ट्रासाऊड किया जाता है। उन्होने बताया कि गर्भवस्था के दौरान ये अल्ट्रासाऊड करवाना बेहद जरूरी है।
अपोलो अस्पताल में दे चुकी हे सेवाए डॉ रितिका
नाहन के श्री साई अस्पताल में स्त्री रोग व प्रसूति विशेषज्ञ डॉ रितिका दीनानाथ पिछले दो सालों से दिल्ली के अपोलो अस्पताल में अपनी सेवाए देते रहे है। फिलहाल पहााड़ी क्षेत्रों से लगाव व साई अस्पताल में उपलब्ध बेहतरीन सुविधओं के चलते उन्होने नाहन में अपनी सेवाए देने का निर्णय लिया। उन्होने माना कि नाहन मे अधिकांश महिलाए गर्भावस्था के दौरान होने वाले अल्ट्रासाऊड को लेकर काफी संशय में रहती है। जिसके कारण उनका अल्ट्रासाऊड सही समय पर नही हो पाया। फिलहाल डॉ रितिका श्री साई अस्पताल में अपने अनुभव से महिलााओं के स्वास्थ की जांच कर रहे है।
खतरा बन सकता है गर्भ में बच्चे को अधूरा
इस प्रकार के अल्ट्रासाऊड से भ्रूण की सारी परिस्थिति स्पष्ट पता चल जाती है। अल्ट्रासाऊड उन महिलाओं की लिए बेहद जरूरी होता है जो गर्भवस्था के दौरान किसी न किसी मानसिक परेशानी से घिरी होती है। उन्होने बताया कि नॉमरली अल्ट्रासाऊड केवल हार्टवीट व भ्रूण की पोजिशन देखने के लिए किया जाता है परंतु लेवल 2 अल्ट्रासाऊड से बच्चे की हर विकास का आकलन किया जा सकता है। गर्भवास्था के दौरान प्लेसेंटा की स्थिति का पता लगाया जाता है। लगभग 11 से 14 हफ्ते मे पता किया जाता है कि बच्चे को डाऊन सिंड्रोम होने के खतरा तो नही, साथ ही नाक की हड्डी और गर्दन के पीछे वाली त्वचा की मोटाई को मापा जाता है। इसके अलावा ब्रेन , रीड़ की हडड्ी व हार्ट के संपूर्ण विकास की जांच की जाती है।यदि इनमें से किसी एक भी अंग का विकास अधूरा होता है तो बच्चा जन्म के बाद सरवाइव नही कर पाता। डॉ रितिका ने बताया कि यदि गर्भ में बच्चे के ब्रेन, बोन्स या हार्ट को लेकर कोई समस्या होती है तो ऐसी प्रेगनेनसी को अबोर्ट करने की सलाह दी जा सकती है। क्योकि ऐसे बच्चा जन्म लेने के तुरंत बाद लबें समय तक जिवित नही रह पाता और मानसिक रूप से मां को पेरशानी झेलनी पड़ती है।
श्री साई अस्पताल मे कम से कम शुल्क में होता है लेवल 2 अल्ट्रासाऊड
जानकारी देते हुए डॉ रितिका ने बताया कि श्री साई अस्पताल में यह अल्ट्रासांऊड नाम मात्र खर्च पर उपलब्ध है। उनका कहा कि गर्भवति महिलाओं को लेवल 2 अल्ट्रासॉऊड बेहद जरूरी है। इससे मां और बच्चा दोनो स्वस्थ रहते है।


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